March 27, 2009 – 10:39 pm
शत्रु से बचो। कार्य सिद्ध होगा।
शिव प्रश्नावली
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प्रश्नावली देखने की विधि- प्रश्न करने वाला भगवान् शिव का ध्यान करके “ॐ नमः शिवाय” मन्त्र बोलकर शिव प्रश्नावली में किसी भी अंक पर अंगुली रखे और अपने प्रश्न का फल जानें।
१॰ धन लाभ श्रेष्ठ, कार्य सिद्ध हो।
२॰ कष्ट मिटें, धन लाभ।
३॰ उत्तम कार्य सिद्धि हो।
४॰ शत्रु से बचो। कार्य सिद्ध होगा।
५॰ उत्तम धन लाभ श्रेष्ठ।
६॰ मनोकामना सिद्ध होगी।
७॰ मित्रों के सहयोग से कार्य बने।
८॰ अभी देर है।
९॰ इच्छा पूरी होगी।
१०॰ धन लाभ, कार्य सिद्ध हो।
११॰ कार्य की सिद्धि कुछ देर से होगी।
१२॰ कार्य सिद्ध होने में कुछ सन्देह है।
१३॰ कार्य सिद्धि नहीं होगी।
१४॰ दक्षिण-पश्चिम से लाभ हो। कार्य सिद्ध हो।
१५॰ प्रेमी के सहयोग से कार्य बनेगा।
१६॰ कार्य के पूरे होने में सन्देह है।
१७॰ प्रसन्नता व धन लाभ हो।
१८॰ परिश्रम से ही कार्य सिद्धि सम्भव है।
१९॰ तीन माह में कार्य सिद्धि सम्भव है।
२०॰ उत्तम धन का लाभ व कार्य सिद्धि हो।
२१॰ कार्य पूरा होने में सन्देह है।
२२॰ कार्य सिद्धि होगी।
२३॰ उत्तम धन लाभ। कार्य सिद्धि हो।
२४॰ इच्छा पूरी होगी।
२५॰ मित्रों के सहयोग से कार्य सिद्धि हो।
December 31, 2008 – 7:45 pm
पीर विरहना का मन्त्र प्रयोग
“पीर विरहना, फूल विरहना, घुंघु करे। सवा सेर का तोसा खाए, अस्सी कोस का धावा करे। सात सै कुतक आगे चले, सात सै कुतक पीछे चले। छप्पन सै छूरी चले। बावन से वीर चलें, जिनमें गठ गजना का पीर चले। और की ध्वजा उखाड़ता चले, अपनी ध्वजा टेकता चले। सोते को जगावता चले, बैठे को उठाता चले। हाथों में हाथकडी गेरे, पैरों में परे बेडी गेरे। हलाल माही दीठ करे, मुरदार माही पीठ करे। कलवान नवी कूँ याद करे। ॐ ॐ ॐ नमः ठः ठः स्वाहा।”
विधिः- ‘ग्रहण’ की रात्रि से प्रयोगारम्भ करे। नित्य १०८ बार जपे। चमेली के पुष्प चढ़ाए। हलवे का सवा सेर भोग लगाए। ४० दिनों में पीर विरहना उपस्थित होगा। उस समय डरे नहीं, जो काम उससे कहा जाएगा, वह काम वह कर देगा। आपके समक्ष उपस्थित रहेगा। वह आपकी सहायता सदा के लिये करता रहेगा।
विशेषः- १॰ पीर की साधना में पाक-साफ रहना अनिवार्य है।
२॰ अशुभ कार्य हेतु उक्त प्रयोग कदापि न करे।
पाठान्तर
“पीर विरहना, फूल विरहना, धुँ धुँ करे। सवा सेर का तोसा खाए, अस्सी कोस का धावा करे। सात सै कुतक आगे चले, सात सै कुतक पीछे चले। जिसमें गठ गजना का पीर चले और ध्वजा टेकता चले। सोते को जगावता चले, बैठे को उडावता चले। हाथों में हथकडी गेरे, पैरों में बेडी गेरे। माही पाठ करे, मुरदार माँही पीठ करे। कलबोन नवी कूँ याद करे। ॐ ॐ ॐ नमः हूँ ठः ठः स्वाहा।”
विधिः- ‘ग्रहण’ की रात्रि से प्रयोगारम्भ करे। नित्य १०८ बार जप करते समय चमेली के १०८ पुष्प चढ़ाए। आटे का सवा सेर का हलवा भोग लगाए। ४० दिनों में पीर विरहना उपस्थित होगा। उस समय डरे नहीं, जो काम उससे कहा जाएगा, वह काम वह कर देगा। आपके समक्ष उपस्थित रहेगा। वह आपकी सहायता सदा के लिये करता रहेगा।